सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर पूर्वव्यापी 28% जीएसटी की संवैधानिक वैधता की पुष्टि 

पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था/GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • सर्वोच्च न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर सरकार द्वारा लगाए गए पूर्वव्यापी प्रभाव वाले 28% वस्तु एवं सेवा कर (GST) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है।

परिचय

  • गेमिंग उद्योग का तर्क था कि ऑनलाइन गेमिंग पर 28% जीएसटी केवल वर्ष 2023 से लागू होना चाहिए, जब जीएसटी परिषद द्वारा अनुमोदित संशोधन प्रभावी हुए थे।
  • हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की व्याख्या को स्वीकार करते हुए वर्ष 2023 के जीएसटी संशोधनों को स्पष्टीकरणात्मक माना और इस प्रकार वर्ष 2023 से पूर्व की अवधियों पर भी इसके पूर्वव्यापी अनुप्रयोग को वैध ठहराया।

ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र

  • वर्ष 2024 में भारतीय ऑनलाइन गेमिंग बाजार ने लगभग 232 अरब रुपये का राजस्व अर्जित किया, जिसमें से 77 प्रतिशत राजस्व लेन-देन आधारित खेलों से प्राप्त हुआ।
  • यह क्षेत्र 11 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ते हुए वर्ष 2027 तक लगभग 316 अरब रुपये के आकार तक पहुँचने की संभावना है।
  • इस क्षेत्र को व्यापक रूप से तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
    • ई-स्पोर्ट्स : ई-स्पोर्ट्स प्रतिस्पर्धात्मक डिजिटल खेलों को संदर्भित करता है, जो बहु-खेल आयोजनों का हिस्सा होते हैं तथा जिनमें टीमें अथवा व्यक्ति संगठित प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।
      • ई-स्पोर्ट्स में सफलता हेतु रणनीति, समन्वय तथा उन्नत निर्णय-निर्माण कौशल की आवश्यकता होती है।
    • ऑनलाइन सामाजिक खेल: ये सामान्य मनोरंजन का हिस्सा बनने वाले अनौपचारिक खेल हैं।
      • ये मुख्यतः कौशल-आधारित होते हैं तथा मनोरंजन, शिक्षण अथवा सामाजिक सहभागिता के उद्देश्य से विकसित किए जाते हैं।
      • ऐसे खेल सामान्यतः सुरक्षित माने जाते हैं।
    • ऑनलाइन धन-आधारित खेल : इस श्रेणी में वे खेल शामिल हैं जिनमें धनराशि लगाई जाती है।
      • ये खेल संयोग, कौशल अथवा दोनों के मिश्रण पर आधारित हो सकते हैं।
      • इन मंचों के कारण व्यसन, वित्तीय हानि, धन-शोधन तथा आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं की रिपोर्टें सामने आई हैं।
      • अनुमान है कि ऐसे मंचों से लगभग 45 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि कुल वित्तीय हानि 20,000 करोड़ रुपये से अधिक रही है।

ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन (PROG) अधिनियम, 2025

  • अधिनियम का दायरा यह अधिनियम सभी प्रकार के ऑनलाइन धन-आधारित खेलों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
    • यह प्रतिबंध संयोग-आधारित, कौशल-आधारित तथा दोनों के मिश्रित खेलों पर लागू होगा।
    • केवल ऑनलाइन सामाजिक खेलों एवं ई-स्पोर्ट्स को अनुमति प्रदान की जाएगी।
  • भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण: अधिनियम के अंतर्गत भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (OGAI) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है, जो ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र के लिए एक समर्पित नियामक संस्था होगी।
    • इस प्राधिकरण को व्यक्तियों को उपस्थिति सुनिश्चित करने, साक्ष्यों की जाँच करने तथा बाध्यकारी आदेश जारी करने जैसी अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ प्राप्त होंगी।
    • संरचना:
      • एक अध्यक्ष
      • पाँच सदस्य (विभिन्न मंत्रालयों से)
    • प्रमुख कार्य:
      • यह निर्धारित करना कि कोई खेल “ऑनलाइन धन-आधारित खेल” है या नहीं।
      • ऑनलाइन खेलों का पंजीकरण करना।
      • दंड अधिरोपित करना तथा निर्देश जारी करना।
      • यदि कोई खेल सट्टेबाजी अथवा जुए से संबंधित मॉडल अपनाता है तो उसका पंजीकरण निरस्त करना।
  • पंजीकरण: ई-स्पोर्ट्स तथा ऑनलाइन सामाजिक खेलों के लिए प्राधिकरण के साथ अनिवार्य पंजीकरण आवश्यक होगा।
    • पंजीकरण प्रमाणपत्र की वैधता अधिकतम पाँच वर्ष होगी।
  • विनियमन: कंपनियों को अपने खेलों का पंजीकरण कराना होगा।
    • उन्हें अपने राजस्व मॉडल तथा उपयोगकर्ता सुरक्षा उपायों का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
    • साथ ही यह प्रमाणित करना होगा कि उनका राजस्व विज्ञापन, सदस्यता अथवा प्रवेश शुल्क से प्राप्त होता है, न कि सट्टेबाजी से।
  • दंड एवं अपराध: ऑनलाइन धन-आधारित गेमिंग सेवाएँ प्रदान करने पर अधिकतम तीन वर्ष का कारावास तथा एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • ऐसे मंचों के विज्ञापन पर दो वर्ष तक का कारावास तथा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • इन प्रावधानों का उल्लंघन गैर-जमानती अपराध माना जाएगा तथा उल्लंघन को सुगम बनाने वाले कंपनी के समस्त कर्मचारी उत्तरदायी ठहराए जा सकते हैं।
  • दंड निर्धारण के आधार:
    • उल्लंघन से प्राप्त लाभ
    • उपयोगकर्ताओं को हुई हानि
    • अपराध की पुनरावृत्ति
  • शिकायत निवारण तंत्र (त्रिस्तरीय व्यवस्था):
    • प्रथम स्तर:संबंधित गेमिंग कंपनी का आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र।
    • द्वितीय स्तर:सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अंतर्गत गठित शिकायत अपीलीय समिति (GAC)।
    • तृतीय स्तर: भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण अंतिम अपीलीय प्राधिकरण होगा।
  • विभिन्न प्राधिकरणों की भूमिका: ई-स्पोर्ट्स का प्रशासन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन होगा, जबकि ऑनलाइन सामाजिक खेलों का विनियमन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
    • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) समग्र नियामक उत्तरदायित्व का निर्वहन करेगा।
    • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ऑनलाइन सामाजिक खेलों के वर्गीकरण (मनोरंजनात्मक, शैक्षिक, कौशल-आधारित आदि) हेतु आचार संहिताएँ एवं दिशा-निर्देश जारी करेगा।

नियमों की आवश्यकता

  • पारदर्शिता एवं उपभोक्ता संरक्षण: इन नियमों का उद्देश्य भारत के तीव्र गति से विकसित हो रहे ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व तथा उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करना है।
  • नियामक ढाँचे का अभाव: विधिक ढाँचे के अभाव ने इस क्षेत्र के सुव्यवस्थित विकास एवं उत्तरदायी गेमिंग प्रथाओं को बढ़ावा देने में बाधा उत्पन्न की है।
    • अतः त्वरित नीतिगत हस्तक्षेप एवं समर्थन तंत्र की आवश्यकता है।
  • प्रमुख चिंताएँ: मोबाइल फोन, कंप्यूटर तथा इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन धन-आधारित खेलों के प्रसार तथा वित्तीय लाभ के प्रलोभन ने गंभीर सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक एवं जनस्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न की हैं।

महत्त्व

  • यह अधिनियम राष्ट्रीय स्तर पर एक समान एवं व्यापक विधिक ढाँचा स्थापित करेगा।
  • यह देश के युवाओं को भ्रामक आर्थिक लाभ के प्रलोभन देकर प्रभावित करने वाले रियल मनी गेमिंग अनुप्रयोगों से सुरक्षा प्रदान करेगा।
  • साथ ही यह जुआ, व्यसन तथा वित्तीय जोखिमों पर नियंत्रण स्थापित करते हुए नैतिक एवं कौशल-आधारित गेमिंग को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा।

स्रोत: IE

 

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